Principal's Message

DR. ALKA MESHRAM

[प्राचार्य]

इन्दिरा गांधी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय

वैशाली नगर, भिलाई, जिला–दुर्ग (छ॰ग॰) 

महाविद्यालय का सुव्यवस्थित संचालन -

शासन की मंशा के अनुरूप चूंकि प्राचार्य प्रशासनिक प्रमुख होने के अलावा मूलतः शिक्षक होता है अतः उसे स्वयं कक्षाएं लेकर पठन-पाठनको प्रोत्साहित करना चाहिए। हमने लगातार बखूबी यही कार्य किया। कला, विज्ञान, गृह विज्ञान और वाणिज्य में पर्यावरण तथा कला स्नातक प्रथम, द्वितीय और तृतीय कक्षाओं में संस्कृत का अध्यापन किया। चूँकि युवाशक्ति कक्षाओं के अंदर ऊर्जा के रचनात्मक उपयोग में व्यस्त रही, इसलिए कॉलेज परिसर में अनुशासनहीनता नहीं फाटक पायी। प्राचार्य द्वारा शैक्षणिक स्टाफ के समक्ष समय पर आने, पूरे समय तक कॉलेज में रहने तथा स्वयं कक्षाएं भी लेने से जो उदाहरण प्रस्तुत किये, उनसे यह तथ्य पुनः उभर कर सामने आये कि कक्षाएं नियमित ठीक से चलें तो अन्य समस्यायें या अव्यवस्थायें स्वतः समाप्त हो जाती है। संस्था के सुव्यवस्थित संचालन में यह प्रक्रिया बड़ी सहायक सिद्ध हुई है। पूरे स्टाफ के सहयोग से सकारात्मक वातावरण बना है।

छात्रों कि समस्याओं के समाधान में प्राचार्य की संवेदलशीलता –

संस्था के प्रशासनिक प्रमुख होने के नाते विद्यार्थियों और स्टाफ कि समस्याओं को पहले ही भाँपना और उनका अग्रिम समाधान करने का विनम्र प्रयास भी किया गया। रसायन विज्ञान, जन्तु विज्ञान, प्रोध्योगिकी सूक्ष्मविज्ञान, कम्प्युटर विज्ञान तथा संस्कृत आदि सभी महत्वपूर्ण विषयों के 6-7 शिक्षाकीय पद रिक्त थे। भर्ती पर कहीं न्यायालीन रोक और कहीं तकनीकी असमंजस था। इधर जंभागीदारी समिति भी अस्तित्व में न थी। इन विकट बाधाओं में मध्य विकराल समस्या तो सुलझानी ही थी। शिक्षकों कि अस्थायी ही सही, किन्तु व्यवस्था की गई। विद्यार्थी हित को सर्वोच प्राथमिकता देते हुए, उनका वर्ष बर्बाद होने से बचा लिया। बाद में जनभागीदारी समिति का भी सहयोग मिला और शिक्षकों का इसमें सहयोग रहा। आशा है ये आगे भी जारी रहेगा। 

छात्रों में देश भक्ति, अनुशासन और चरित्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य करते हुए प्राचार्य ने प्रयास पूर्वक एन॰सी॰सी॰ (नेवल विंग) खुलवाई। आज उसके प्रति बच्चे आकर्षित हो रहे है। एन॰सी॰सी॰ कैडेट्स राष्ट्रीय स्तर पर कॉलेज का नाम रोशन कर रहे हैं। संस्कृत शिक्षण से भी उन्हें सुसंस्कृत करने का प्रयास जारी है। उनके अच्छे स्वास्थ और खेल के लिए कॉलेज में सुव्यवस्थित, समतल खेल परिसर विकसित किया गया है। बी॰पी॰एल॰/स्लम एरिया में स्थापित इस कॉलेज में स्थापित इस कॉलेज में साइकल स्टैंड के न होने से विद्यार्थियों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता था। इसे दूर करते हुए, 1084000-00 (दस लाख चौरासी हज़ार) रुपये की लागत से, नगर पालिक निगम, भिलाई के सौजन्य से इसी वर्ष, छात्रों की आवश्यकता के अनुरूप साइकल स्टैंड बनवा लिया गया है। कॉलेज से रैगिंग जैसी कुप्रथा पूर्णतः समाप्त है। प्राचार्य के निर्देशन में एंटी रैगिंग कमेटी ने इस के विरुद्ध दण्ड विद्यान के विषय में जागृति तथा निर्भयता का वातावरण बना गया है। नवागत छात्रों का स्वागत होता है, यह रैगिंग नहीं। इसमें सबका और भी सहयोग अपेक्षित है। 

महाविद्यालय भवन विस्तार और संधारण हेतु नगर निगम से लोक निर्माण विभाग छ॰ग॰ शासन में कॉलेज बिल्डिंग का हस्तांतरण पिछले 23 साल से लंबित विकास हेतु कॉलेज भवन के विस्तार एवं संधारण में कई तकनीकी दिक्कतें थीं। व्यक्तिगत रुचि लेकर प्राचार्य ने विश्वविध्यालय अनुदान आयोग, भोपाल दिल्ली से सफल यात्रा और प्रयास किये। अनुदान स्वीकृत हुआ, कार्य प्रारम्भ हो गए हैं और हस्तांतरण का मार्ग प्रशस्त हुआ। इस कार्य के भी इसी वर्ष होने की आशा है। छात्रों हेतु कक्षाभवनों, शौचालयों, छात्राकक्ष तथा प्रयोगशाला भवनों की कमी जैसी छात्रों की बड़ी समस्याएँ समाप्त हो जायेंगी। 

महाविद्यालय में बाहरी असामाजिक तत्वों के अनधिकृत प्रवेश –

आवागमन पर रोक लगाई। कॉलेज परिसर में शादी-समारोह आदि से गंदगी, अशांति शिक्षण विरोधी माहौल को समाप्त किया। समस्याओं का पूर्वानुमान तथा योजनाबद्ध तैयारी और सबके साथ मिलकर कार्य करने का यह सुपरिणाम है। इन कार्यों में राज्यशासन, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, लोकनिर्माण विभाग तथा नगर पालिक निगम, भिलाई का पूर्ण सहयोग मिला और मिल रहा है। यही कारण है की प्राचार्य एवं स्टाफ का मनोबल बढ़ा है। संस्था निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है। 

प्राचार्य द्वारा छात्रों विशेषतः कमजोर छात्रों की शैक्षणिक उपलब्धि हेतु उच्चस्तरीय प्रयास –

संस्था के छात्र उच्चस्तर पर शैक्षणिक उपलब्धियों को छूएँ इसके लिए प्राचार्य द्वारा हर समय प्रयास किये गए। यू॰जी॰सी॰ से लगभग 20,00,000 (बीस लाख) रुपये का अनुदान प्रपट करने में सफलता हासिल की। इस राशियो से पढ़ाई के लिए सुविधाजनक साधन सम्पन्न वातावरण तैयार किया गया। प्रायः सभी वर्गों के छात्र कोई न कोई छात्रवृति पा रहे हैं। अब एन॰सी॰सी॰ तथा संस्कृत हेतु भी विशेष छात्रवृति प्रारम्भ हो जायेंगी। कमजोर वर्ग के छात्रों को विशेष आर्थिक सहायता भी दी जाती है। कॉलेज में और दो बड़े वॉटर कूलर लगवाए गये हैं। ऑडियो-विडियो विजुवल एवं अच्छे साउंड सिस्टम के साथ सर्वसुविधा से सुसज्जित कॉन्फ्रेंस हॉल तैयार कराया गया है। विषय पर केन्द्रित आधुनिक ज्ञान-विज्ञान को विद्यार्थी अघुनातन पद्धति से प्राप्त कर पा रहे है। बिजली गोल हो जाने से व्यवधान को रोकने के लिए एक बड़े जनरेटर का इन्स्टौलेशन किया गया है। आवश्यकतानुसार उसे इस वर्ष लगातार और समृद्ध किया गया है। इस वर्ष चार हज़ार पुस्तकों का सर्कुलेशन हुआ है। कम्प्युटर एवं इंटरनेट की सुविधाओं का भी पर्याप्त विस्तार किया गया है।

अधिकांश शैक्षणिक स्टाफ पी-एच॰डी॰ उपाधिधारी है। उनमें से भी अधिकांश को अधुनातन ज्ञान-विज्ञान से जोड़ा गया है। इससे विद्यार्थियों को अच्छे मार्गदर्शक शिक्षक उपलब्ध हो रहे है। शोध और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए ‘राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी’ (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रायोजित) का सफल आयोजन किया गया। इसमें समूचे स्टाफ का सराहनीय सहयोग रहा। 

उधर कैरियर्स काउंसिलिंग सेल, इक्वल ऑपर्चुनिटी सेंटर (अ॰जा॰/अ॰जा॰जा॰ आदि हेतु विशेष) रिसोर्स पर्सन सेंटर तथा रेमेडियल (अ॰जा॰/अ॰जा॰जा॰ आदि हेतु विशेष) कोचिंग सेंटर तथा लोक सेवा आयोग की परीक्षा में चयन हेतु विशेष कोचिंग सेंटर आदि का संचालन यू॰जी॰सी॰ के सौजन्य एवं सहयोग से कुशलता पूर्वक संचालित है। सभी वर्गों के कमजोर छात्रों को इनसे बहुत लाभ हुआ है। इनसे न केवल छात्रों को उच्चस्तरीय शैक्षणिक उपलब्धियाँ हासिल हो रही है, अपितु रोजगार के भी स्वर्णिम अवसर उन्हें प्राप्त हो रहे हैं। अ॰जा॰, अ॰जा॰जा॰, अ॰पि॰व॰, अल्पसंख्यक तथा छात्राबहुल संस्था होने से बड़ी संख्या में हैं, ये सभी इस सबका भरपूर लाभ उठा रहे हैं। प्राचार्य का यह प्रयत्न कमजोर वर्गीय छात्रों के लिए वरदान सिद्ध हो रहा है। 

स्नातक स्तरीय महाविद्यालय के रूप में संस्था का संचालन विगत 23 वर्ष से हो रहा है। सबके सामूहिक प्रयास से कॉलेज को 2009 में नैक का “बी ग्रेड” प्राप्त हुआ। अब प्राचार्य एवं महाविद्यालय परिवार का सम्मिलित एवं समन्वित प्रयास है कि कम से कम पाँच विषयों में स्नातकोत्तर कक्षाएँ, कॉलेज के रजतजयंती वर्ष 2014 से पूर्व प्रारम्भ हो जाये। एतदर्थ राज्यशासन का तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग आग्रह पूर्वक निवेदन किया गया है, कार्य प्रगति पर है। 

इससे छात्रों, विशेषतः कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राओं की उच्चस्तरीय प्रगति और विकास को और भी बल मिलेगा। शिक्षण के साथ-साथ शिक्षणेत्तर गतिविधियाँ भी वर्ष भर पूरे उत्साह और उल्लासमय वातावरण के साथ जारी रहीं। राष्ट्रभाष गौरव पर्व, देववाणी पर्व, विज्ञान प्रश्न मंच, विज्ञान प्रदर्शनी एन॰सी॰सी॰ एवं एन॰एस॰एस॰ द्वारा श्रमदान, वस्त्रदान, अन्नदान, एल्मुनी सम्मेलन, शिक्षक-अभिभावक सम्मेलन, राष्ट्रीय मतदाता जागरूकता दिवस, एड्स जागरूकता दिवस, भ्रष्टाचार विरोध दिवस, निराश्रित बच्चों के मध्य बाल दिवस, अंतर्राष्ट्रीय साक्षारता दिवस आदि के सार्थक एवं प्रेरणप्रद कार्यक्रम करके बच्चों के अभिव्यक्ति कौशल को सुअवसर एवं मंच दिये गये। इन्हे समारोह पूर्वक सम्मानित भी किया गया।

प्राचार्य का पर्यवेक्षण, अनुशासन और संवेदना – 

अधीनस्थ शैक्षणिक स्टाफ पर नियंत्रण और पर्यवेक्षण पर भी प्राचार्य ने विशेष ध्यान दिया। परस्पर विश्वास और सहयोग की संस्कृति को विकसित करने का प्रयास किया गया। वर्ष में प्रतिमाह नियमित उपस्थिति पंजीयन और शिक्षक दैनंदिनी का अवलोकन किया गया, वर्ष में चार बार समीक्षा बैठक में कार्य मूलयांकन एवं समीक्षण किया तथा अकादमिक कलेंडर का परिपालन सुनिश्चित कराया गया। आवश्यक होने पर अनुशासन की सीख भी दी गयी। साथ ही अध्ययन और अनुसान्धन को प्रोत्साहन भी दिया गया। इसके अच्छे परिणाम आये। कॉलेज में प्रथम बार दिल्ली से स्वीकृत एक बृहत शोध परियोजना तथा भोपाल से स्वीकृत दो लघु शोध परियोजनाओं पर शिक्षक कार्य कर रहे है। जबकि एक बृहत शोध परियोजना एवं तीन लघु परियोजनायें स्वीकृत हेतु यू॰जी॰सी॰ में विचारधीन है। साथ ही पर्यावरण पर राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का प्रस्ताव भी यू॰जी॰सी॰ में विचारधीन है। साथ ही पर्यावरण पर राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का प्रस्ताव भी यू॰जी॰सी द्वारा स्वीकृति के पश्चात सफल आयोजन किया गया। 

अधीनस्थ कर्मचारी एवं अशैक्षणिक स्टाफ के नियंत्रण, पर्यवेक्षण और उनकी समस्याओं के निराकरण में अनुशासन के साथ-साथ मानवीय संवेदना पूर्वक चिंतन करके रास्ते निकाले गये। दिवंगत सहा॰प्राध्यापिका श्रीमति डॉ॰ परर्मिंदर कौर को न केवल उनकी गंभीर बीमारी (कैंसर) के दौरान सहानभूति पूर्वक सहयोग किया, अपितु उनके निधन के पश्चात पूरी संवेदना के साथ उनके परिवार को उनके स्वतवों का भी तत्काल भुगतान किया गया। जरूरी गोपनीयता और विश्वसनीयता का पूरा खयाल रखा जाता है। योग्यता और अनुभव को कार्य वितरण में वरीयता दी गयी। सब पर निगरानी राखी गयी। साथ ही शिक्षण, प्रशिक्षण तथा योग्यता संवर्धन के अवसर भी अधीनस्थ कर्मचारियों को संरक्षण पूर्वक सुलभ कराये गये। उनकी समस्याओं के त्वरित निवारण किए गये। 


कुल मिलाकर प्रयास यह है कि कॉलेज का यह प्रथम सेवक प्राचार्य (डॉ॰ महेशचन्द्र शर्मा) अपनी संस्था के आदर्श वाक्य – “मनसा वाचा कर्मणा” के अनुरूप पूर्णतः समर्पित है। किन्तु यह समर्पण संस्था रूपी समस्त परिवार के सौजन्य एवं सहयोग से ही संभव हुआ है। आईये हम सब महाविद्यालय के चौमुखी विकास में तन-मन-वचन और धन से समर्पित हो जायें। इस ज्ञान-विज्ञान यज्ञ में सभी अपनी आहुति डालें तो सपने साकार अवश्य होंगे – 

सह नाववतु सह नौ मुक्तू सहवीर्य करवाव है। 

तेजस्विनावाधीतमस्तु मा विद्विषावहै ।।

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